द्वादश भावों में केतु एवं मंगल की युति का शास्त्रीय विश्लेषण
केतु एक छाया ग्रह है जो मोक्ष, वैराग्य, अध्यात्म, अचानक घटनाएँ, पूर्व जन्म के संस्कार, रहस्यवाद और गूढ़ विद्याओं का कारक है। केतु मंगल के समान ही रक्त-वर्ण का और तामसिक प्रकृति का माना जाता है।
मंगल एक क्रूर ग्रह है जो शक्ति, साहस, ऊर्जा, क्रोध, भूमि, भवन, सेना, पुलिस, यंत्र-तंत्र, रक्त, दुर्घटना और शल्य चिकित्सा का कारक है। मंगल को सेनापति का पद प्राप्त है।
दोनों की युति अत्यंत प्रभावशाली और विस्फोटक होती है। यह युति अग्नि और अग्नि का संयोग है। केतु मंगल की ऊर्जा को अचानक, अप्रत्याशित और कभी-कभी विनाशकारी दिशा में मोड़ सकता है। दोनों ही ग्रह तामसिक प्रवृत्ति के हैं, अतः इनकी युति रहस्यमयी शक्तियाँ, गुप्त विद्याएँ, तांत्रिक सिद्धियाँ और अत्यधिक साहस प्रदान करती है — परंतु साथ ही दुर्घटनाओं, शस्त्र-प्रहार और रक्त संबंधी रोगों की संभावना भी बढ़ाती है।
शुभ राशियाँ: मेष, वृश्चिक, मकर, धनु — इनमें युति बलवान और शुभ फलदायी।
मिश्रित राशियाँ: सिंह, कुंभ, मीन — आध्यात्मिक उन्नति।
कठिन राशियाँ: कर्क (मंगल नीच), तुला (मंगल नीच) — विशेष उपाय आवश्यक।
गुरु (बृहस्पति) की दृष्टि या युति सर्वोत्तम — यह संयम, ज्ञान और आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। सूर्य की युति आत्मबल बढ़ाती है परंतु पित्त और क्रोध भी बढ़ा सकती है। शुक्र की दृष्टि वैवाहिक और भौतिक सुखों में सुधार लाती है।
शनि की युति या दृष्टि — अत्यधिक विलंब, बाधाएँ और दीर्घकालीन संघर्ष। राहु की युति — अत्यधिक भ्रम, माया और गलत दिशा में शक्ति का उपयोग। चंद्रमा की युति (अमावस्या या क्षीण चंद्र) — मानसिक अस्थिरता और अनिद्रा।
मंगलवार का व्रत और हनुमान चालीसा का पाठ। केतु के लिए गणेश पूजा और "ॐ केतवे नमः" का जाप। रक्तदान अति उत्तम उपाय। भूमि में सुरंग/गड्ढा निर्माण (जल संरक्षण हेतु)। सिंदूर, ताँबा और मूँगा धारण विचारणीय। केतु हेतु लहसुनिया या बिल्लौर भी धारण किया जा सकता है।
मंगल बीज मंत्र: "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः"
केतु बीज मंत्र: "ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः"
हनुमान मंत्र: "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः हनुमते नमः"
इन मंत्रों का नियमित जाप अत्यंत लाभकारी।
केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा, मूल) में युति — आध्यात्मिकता और सिद्धियाँ तीव्र।
मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) में — साहस, नेतृत्व और भौतिक सफलता।
दोनों के ही नक्षत्रों में — योग अत्यंत प्रबल, दोनों दिशाओं में फलदायी।